ग़ज़ल

आप आये और आपकी ख़ुशबू
घर में महकी गुलाब की खुशबू

जिस्म  मेरा  है , पर जो महके है
कुछ नही और, आपकी  खुशबू

सुब्ह के साथ, सब हुए रुख़्सत
रह  गयी  साथ ,रात  की खुशबू

वो टिशू  जिसने  उनके लब चूमे
बस गयी उसमे  साँस की खुशबू

तुमने बालों में उँगलियाँ फेरीं
रह गयी उनमे हाँथ की खुशबू

जी हाँ  हर एक ग़ज़ल के मिसरे में
बस  तेरी  बात ,  बात  की  खुशबू




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